crossorigin="anonymous"> असके अवचेतन ने उसके पिता की वसीयत की जगह बता दी - Motivation For Life

असके अवचेतन ने उसके पिता की वसीयत की जगह बता दी

ह्युगो आर . नामक युवक ने लॉस एंजेलिस में मेरे भाषण सुने । उसने मुझे अवचेतन मन की शक्ति के बारे में अपना अनुभव बताया । उसके पिता का अचानक देहांत हो गया था और ऐसा लग रहा था कि उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी ।

असके अवचेतन ने उसके पिता की वसीयत की जगह बता दी

बहरहाल , उसकी बहन ने उसे बताया कि उनके पिता ने एक बार अपनी वसीयत बनाने का जिक्र किया था और उसे बताया था कि उन्होंने सबमें न्यायपूर्ण बंटवारा किया था । ह्युगो को एहसास था कि अगर उसके पिता की वसीयत नहीं मिली , तो जायदाद राज्य के नियमों के आधार पर बंटेगी , जो शायद उसके पिता की इच्छाओं के अनुरूप नहीं होगा । इसके अलावा , कानूनी फीस में ज्यादातर जायदाद चली जाएगी । उसने और उसकी बहन ने हर जगह तलाश की , लेकिन उन्हें वसीयत कहीं नहीं मिली । हताश होकर वे सोचने लगे कि वसीयत है भी या नहीं ।

तभी ह्युगो को अवचेतन मन के प्रयोग के बारे में सीखी बातें याद आई । सोने से पहले उसने अपने अवचेतन मन से कहा , ” में अब इस आग्रह को अपने अवचेतन मन के हवाले करता हूँ । मेरा अवचेतन मन जानता है कि मेरे पिता की वसीयत कहाँ है और यह मुझे वह जगह बता रहा है । फिर उसने अपने आग्रह को सारांश में कहा , “ जवाब दो । ” उसने इसे बार – बार लोरी की तरह दोहराया । वह ” जवाब दो ” शब्दों के साथ सोने गया ।

अगली सुबह जब वह जागा , तो उसके मन में प्रबल इच्छा जागी कि वह डाउनटाउन लॉस एंजेलिस के एक बैंक में जाए । इससे वह हैरान हो गया । क्या उसके पिता ने कभी इस बैंक का ज़िक्र किया था ? क्या उसने अपने पिता की डाक में इस बक का पत्र देखा था ? वह नहीं जानता था , लेकिन वह इतना ज़रूर जानता था कि उसे अवचेतन द्वारा दिए इस संकेत की जाँच करनी थी ।

 वह उस सुबह बैंक गया । अततः एक बैंक अफ़सर ने इस बात की पुष्टि की कि बैंक में उसके स्वर्गीय पिता के नाम पर एक लॉकर था । जब उस लॉकर को खोला गया , तो अंदर वसीयत मिली ।

जब आप सोने जाते हैं , तो आपका विचार आपके भीतर की निहित शक्तियों को जगा देता है । मान लें , आप सोच रहे हों कि क्या आपको अपना मकान बेच देना चाहिए , कोई शेयर ख़रीद लेना चाहिए , किसी पार्टनरशिप को तोड़ देना चाहिए , न्यूयॉर्क जाकर बसना चाहिए या फिर लॉस एंजेलिस में ही रहना चाहिए , वर्तमान अनुबंध को ख़त्म कर देना चाहिए या नया अनुबंध कर लेना चाहिए । ऐसी उलझन हो , तो यह करें : शांति से अपनी कुर्सी या अपने ऑफ़िस की डेस्क पर बैठ जाएँ ।

याद रखें , यह क्रिया और प्रतिक्रिया का शाश्वत नियम है । क्रिया आपका विचार है । इस पर आपका अवचेतन मन प्रतिक्रिया करेगा । अवचेतन मन प्रतिक्रियाशील है ; यह इसकी प्रकृति है । यह जवाब देता है , पुरस्कार देता है , लौटाता है । यह अनुरूपता के नियम का पालन करता है । यह विचार के अनुरूप प्रतिक्रिया करता है ।

जब आप सही कर्म पर मनन करते हैं , तो आपको अपने भीतर ऐसी प्रतिक्रिया महसूस होगी , जो आपके अवचेतन मन का मार्गदर्शन या जवाब होगी । मार्गदर्शन चाहते समय आप शांति से सिर्फ सही कर्म के बारे में सोचें । इसका मतलब है कि आप अपने अवचेतन मन में रहने वाली असीमित बुद्धिमत्ता का उस बिंदु तक प्रयोग कर रहे हैं , जहाँ यह आपका प्रयोग शुरू कर दे ।

उसके बाद आपके कार्य की दिशा आपके कल्पनावादी ज्ञान द्वारा निर्देशित और नियंत्रित होती है , जो सब कुछ जानता है और सर्वशक्तिमान है । आपका निर्णय सही होगा । सही काम ही होगा , क्योंकि सही काम करने के लिए आप पर अवचेतन का दबाव है । मैं दबाव शब्द का प्रयोग करता हूँ , क्योंकि दबाव ही अवचेतन का नियम है।

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