crossorigin="anonymous"> क्रोध में आकर कार्य करने के नुकशान - Motivation For Life

क्रोध में आकर कार्य करने के नुकशान

आज हम आपको बताएंगे कि क्यों लोग क्रोध में आकर कार्य को करने लगते हैं और उनके सभी कार्य गलत हो जाते है तथा अगर आप भी क्रोध में आकर कार्य करोगे तो इसके क्या क्या नुकसान है और आप किस तरह क्रोधी स्वभाव से अपने जीवन को बर्बाद कर रहे हो|

आइए जानते हैं कि क्रोध में आकर हमें कभी भी कोई कार्य क्यों नहीं करना चाहिए| तथा क्रोध के नुकशान क्या हैं|

क्रोध में अच्छे निर्णय नहीं ले पाते

अगर आप भी क्रोध में आकर किसी भी कार्य को करने लग जाते हो तो इससे आप कभी भी अच्छे निर्णय नहीं ले पाओगे और आपके सभी निर्णय उल्टे ही जाएंगे|

जो लोग क्रोध में आकर कार्य को करने लगते हैं वे उस कार्य से कभी प्रेरणा भी नहीं पा सकते और उनके सभी निर्णय गलत होने लगते हैं क्योंकि क्रोध में हमारा दिमाग उतनी अच्छी तरह से कार्य नहीं करता जितना शांत स्वभाव होने पर करता है|

इसीलिए क्रोध में आकर कभी भी कोई निर्णय ना लें क्योंकि क्रोध लिए हर निर्णय लगभग हमेशा गलत ही साबित होते हैं और जब आपको क्रोध में आकर कोई भी निर्णय लेते हो तो वह निर्णय समझदारी से भरे हुए नहीं होते बल्कि वे आपकी भावनाओं से भरे हुए होते हैं|

याद रखे हम अपनी भावनाओं के द्वारा निर्णय ना लें बल्कि अपने दिमाग से कुछ निर्णय ले| इसीलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले यह देख ले कि क्या आपने यह निर्णय क्रोध में आकर तो नहीं लिया है| फिर आप अपने सभी पक्षों की जांच करें तथा अपने दिमाग का इस्तेमाल करके देखें कि क्या आपने जो निर्णय लिया है वह सही है या नहीं|इस तरह सोच समझ कर लिया गया निर्णय हमेशा ही सही होता हैं|

क्रोध में कार्य अनुचित ही होगा

जो लोग क्रोध में आकर कार्य को करने लगते हैं उनके सभी काम उल्टे पड़ जाते हैं और उनका कार्य अनुचित ही होता है क्योंकि क्रोध में हमारा दिमाग भावनाओं के द्वारा भर जाता है और हम अपनी भावनाओं के द्वारा ही कार्य करते हैं |

आपने देखा होगा कि जब हमें क्रोध आता है तो हमारा मन अशांत हो जाता है और हमारा दिमाग अच्छी तरह से कार्य भी नहीं करता क्योंकि उसमें हम अपनी भावनाओं के द्वारा सोचने लगते हैं और हम किसी भी प्रकार की कोई भी जांच-पड़ताल नहीं करते और कार्य को बिना किसी तरीके के ही करने लग जाते हैं| इसलिए वह कार्य अनुचित रूप से खत्म होता है और हम कभी भी उसमें सफलता को प्राप्त नहीं कर पाते|

खुद को प्रेरित नहीं रख पाते

अगर आप भी क्रोध में आकर किसी भी कार्य को करोगे तो आप सिर्फ उस कार्य को क्रोध में आकर ही करने की कोशिश करोगे |फिर आप ना कभी उस कार्य से प्रेरित हो पाओगे और ना कभी भी उस कार्य को पूरा कर पाओगे क्योंकि क्रोध में आकर किसी भी कार्य को करना शुरू किया जा सकता है पर उसे खत्म नहीं|  उसे खत्म करने के लिए आपके पास प्रेरणा होनी चाहिए, मोटिवेशन होना चाहिए| तभी आप उस कार्य को आसानी से अंजाम दे पाओगे|

क्रोध से तनाव में लगातार वृद्धि होती है

अगर आप भी क्रोध में आकर कार्य करते हो तो इससे आपके दिमाग पर काफी नकारात्मक असर पड़ता है और आपका दिमाग के अंदर नकारात्मक विचार भी उत्पन्न होने लगते हैं| इसका असर यह होता है कि हम तनाव में आने लगते हैं और हमारे सभी निर्णय गलत भी साबित होने लगते हैं|

जब भी हम कोई कार्य करना शुरू करें तो उसे बिना क्रोध के करें क्योंकि ऐसा करने से हम कभी भी तनाव महसूस नहीं करेंगे और आसानी से अच्छे निर्णय लेकर उस कार्य को पूरा कर पाएंगे|

क्रोध में सारा काम बिगड़ जाता हैं|

जो लोग क्रोध में आकर कार्य करते हुए अपने सभी कार्य को बिगाड़ देते हैं| क्रोध में आने के बाद में आपका शरीर पूरी तरह से काम नहीं करता है और आपकी मांसपेशियां भी अच्छी तरह से खुलती नहीं है| इसका असर यह होता है कि हमारे हाथ भी अच्छी तरह से नहीं चलते हो और हम जल्दबाजी में कुछ ऐसा कर देते हैं जिनसे हमारा सारा बना बनाया काम बिगड़ जाता है|

हमेशा हम अपने मन को शांत रखकर कार्य को करें क्योंकि ऐसा करने से हमारा शरीर भी हमारा साथ देगा और हमारा दिमाग भी हमारा साथ देगा|

क्रोध में आकर काम करने से हमारा सहारा बना बनाया काम बिगड़ जाएगा | अगर हम उसे सही तरह से पूर्णा करना चाहते हैं तो हमें शांत रहकर अच्छे नहीं नहीं लेने होंगे और बिना तनाव के उस कार्य को पूरा करना होगा|

क्रोध से समस्याओं में वृद्धि हो जाती है

जब आप भी क्रोध में आकर कोई कार्य करते हो तो आप सही तरह से अपने सभी पक्षों को नहीं देखते हो तथा आने वाली समस्याओं के बारे में भी अच्छी तरह से नहीं सोचते हो| इसका असर यह होता है कि समय के साथ आपकी समस्या बढ़ती चली जाती है क्योंकि आपने उस कार्य को करने से पहले वह समस्याओं पर ध्यान ही नहीं दिया जो आपके सामने आने वाली है|

क्रोध में आकर कोई भी काम करना शुरू ना करें बल्कि हम पहले से ही देख ले कि इस कार्य के अंदर मेरे सामने कौन सी नई समस्याएं आ सकती है ताकि हम उन समस्याओं का सही समय पर समाधान करके अपने जीवन में सफलता को प्राप्त कर सके|

आइए मैं एक बार आपको दोबारा संक्षेप में बता देता हूं कि हमें क्रोध में आकर कभी भी कोई भी कार्य क्यों नहीं करनी चाहिए तथा इसके क्या क्या नुकसान है|

  • अगर आप भी क्रोध में आकर कार्य करते हो तो आपका दिमाग नकारात्मक विचारों से भर जाता है| इसी कारण हम कभी भी अच्छे निर्णय नहीं ले पाते हैं|
  • जब भी आप क्रोध में आकर कार्य करते हो तो इससे आपका शरीर पूरी तरह से खुलता नहीं है और आपका दिमाग पर नियंत्रण भी नहीं होता है| इसका असर यह होता है कि हमारा तनाव का स्तर बढ़ जाता है और हम अच्छी तरह से कार्य नहीं कर पाते|
  • अगर आप भी क्रोध में आकर कार्य करोगे तो इससे आपका शरीर आपका साथ नहीं देगा और हम हर कार्य को अनुचित रूप से ही खत्म करेंगे तथा उसे कभी भी पूरा नहीं कर पाएंगे|
  • क्रोध में आकर कार्य करने से आप कभी भी खुद को मोटिवेशन नहीं दे पाओगे और प्रेरित नहीं हो पाओगे|
  • क्रोध में आकर जब हम कार्य करते हैं तो हम अपनी भावनाओं के द्वारा नियंत्रित होते हैं| इसीलिए हमारा सारा बना बनाए काम बिगड़ जाता है और हम उस कार्य को कभी भी पूरा नहीं कर पाते|
  • जब हम क्रोध में आकर कार्य करते हैं तो हमारे सामनेनयी समस्या पैदा होनी शुरू हो जाती है और हमारे सारे अवसर कहीं अचानक से गायब हो जाते हैं|

अपने क्रोध को अपने कार्य से दूर रखे और हर कार्य को शांत स्वभाव से रहकर करें ताकि हम भी उस कार्य को आसानी से पूरा करके अपने जीवन में सफलता को प्राप्त कर सकें|

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