crossorigin="anonymous"> दुर्बल हम नहीं बल्कि दुर्बलता सिर्फ हमारी सोच है - Motivation For Life

दुर्बल हम नहीं बल्कि दुर्बलता सिर्फ हमारी सोच है

दुर्बल हम नहीं बल्कि दुर्बलता सिर्फ हमारी सोच है| अगर हमने यह सोच लिया कि हम कमजोर है और हम अपने जीवन में कुछ हासिल नहीं कर सकते तो यकीनन ही यह सच होगा और हम जिंदगी भर ठोकरें खाते रहेंगे|

लेकिन अगर हमने यह सोच लिया कि हम मजबूत है और हम प्रतिभाशाली है, हमारी बुद्धि अनंत है और हम अपनी योग्यता के दम पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं तो ऐसा ही होगा और हमें अपने जीवन में अपार सफलता पाएंगे| इसीलिए जरूरी है कि हम कभी भी खुद को दुर्बल ना समझें|

आज तक जितनी भी लोगों ने खुद को दुर्बल समझा है वह कभी भी कुछ भी नहीं बन पाए हैं और उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी गरीबी में ही काटी है|

आज संसार में जितने भी ज्ञानी लोग है, जितनी भी बड़े वैज्ञानिक है, जितने भी बड़े नेता है, जितने भी बड़े संत है, जितनी भी बड़े महान हुये है वह सभी लोग इसीलिए महान बन पाए हैं क्योंकि उन्होंने कभी भी खुद को दुर्बल नहीं समझा| वे जानते थे कि उनके पास एक प्रतिभा है और उन्होंने उस प्रतिभा पर विश्वास किया और वे इसी के दम पर सफलता प्राप्त कर ली|

ऐसा नहीं है कि ऐसी प्रतिभाएं और लोगों के पास नहीं थी| ऐसी प्रतिभाएं और भी लोगों के पास थी पर फिर भी उन्होंने अपने आप को कमजोर समझा और इसी सोच के चलते वह हमेशा ही दुर्बल रह गए और अपने जीवन में कुछ भी नहीं कर पाए| इसीलिए अगर आप भी बहुत ज्यादा ज्ञानी, वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी ,नेता, बड़े संगीतकार, बड़े बिजनेसमैन ,बड़े संत बनना चाहते हैं तो सबसे पहले जानने लायक यही बात है कि हम कभी भी खुद को दुर्बल ना समझे और हम कभी भी यह नहीं समझे कि हम इसे हासिल नहीं कर सकते|

अगर हमने यह सोच लिया कि हम हर चीज कर सकते हैं तो यकीन मानिए हम हर चीज कर सकते हैं| बस हमें उस चीज को पाने के लिए आलस्य को त्यागना होगा और परिश्रम करना होगा और जिस दिन हमने अपने आलस्य को त्याग कर परिश्रम करना शुरू कर दिया उसी दिन हम महानता की ओर अग्रसर हो जाएंगे और अपने सभी सपनों को पूरा कर लेंगे|

इसीलिए हमेशा याद रखें कि आप कमजोर नहीं है बल्कि आप बहुत मजबूत है और खुद के अंदर नयी शक्ति  भरकर लगातार परिश्रम करते रहे और आप उसी परिश्रम के दम पर एक दिन सफलता पा लेंगे लेकिन अगर आपने खुद को दुर्बल पहले ही समझ लिया तो फिर आप कभी भी परिश्रम नहीं कर पाओगे|

बिना परिश्रम के सफलता पाना असंभव है|

बिना परिश्रम के असफलता ही मिल सकती है कभी भी सफलता नहीं मिल सकती|

आलस्य असफलता की जननी है तो परिश्रम सफलता की जननी है |

इसलिए

  • आज से ही खुद के बारे में बुरा सोचना शुरू बंद कर दे|
  • खुद को दुर्बल कहना बंद कर दे|
  • खुद को कमजोर बताना बंद कर दे|
  • खुद पर गालियां देना बंद कर दे|
  • खुद की प्रतिभाओं को दबाना बंद कर दे|
  • अपने शरीर को आलस्य से भरना बंद कर दें |

बल्कि इसके बजाय

  • खुद की प्रतिभाओं पर विश्वास करना शुरू कर दें|
  • आलस्य को त्याग कर परिश्रम करना शुरू कर दें |
  • खुद की प्रतिभाओं के लिए काम करना शुरू कर दें |
  • खुद के सपनों को हासिल करने के लिए योजनाएं बनाना शुरू कर दें |
  • और लगातार प्रयत्न करना शुरू कर दें|

और अगर हम यह करेंगे तो हम भी आसानी से सफलता प्राप्त कर लेंगे|


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