मौन पर सुविचार कुछ समय के लिए चुप रहना भी सीखें

मौन पर सुविचार- जो लोग बहुत ज्यादा बोलते हैं अक्सर उनकी बातों में कोई दम नहीं होता है और उनकी बातों को सुनने में कोई रुचि भी नहीं लेता है| पर जो लोग मौन रहते हैं, कम बोलते हैं उनकी आवाज में भी दम होता है और उनके कथन भी बहुत ज्यादा शक्तिशाली होते है|

प्रभावशाली लोगों की यही आदत होती है कि वह बहुत कम बोलते हैं और जितना भी बोलते हैं बहुत शक्तिशाली बोलते हैं| उनकी हर बात में वजन होता है| ऐसे जब भी बोलते हैं तो उससे पहले पूरी सोच विचार करके ही बोलते हैं| उनके मुंह से निकला गया हर शब्द पहले बहुत बार सोचा गया होता है| उसी के बाद में कुछ बोलने का निर्णय लेते हैं|

असफल लोग बिना किसी सोच विचार के ही ऐसे ही बोलते रहते हैं| इसीलिए उनके ज्यादातर कथन गलत होते हैं और उनकी बातों को सुनने में इतनी ज्यादा कोई रुचि भी नहीं लेता है क्योंकि उनकी बातें के आसपास ज्ञान होता ही नहीं है| उनकी बातें बकवास ही होती है| इसीलिए बहुत अधिक बोलने वाले, हमेशा बकबक करते रहने वाले हो और बिना बात के ही बात करने वालों की कभी कोई नहीं सुनता और ना ही ऐसे लोग कभी सफल होते हैं|

सफलता के लिए आवश्यक है कि हम हमेशा उसी समय बोले जिसमें हमें बोलने की आवश्यकता हो|

मौन पर सुविचार

उचित समय पर उचित तरीके से बोला गया उचित कथन ही हमारी बुद्धिमानी को दर्शाता है|

मौन पर सुविचार

अगर हमने गलत समय पर गलत बात को बोल दिया तो हम सभी के सामने मूर्ख साबित हो जाएंगे और लोग हमारी किसी भी बात पर विश्वास नहीं करेंगे| इसीलिए हम उचित समय पर ही अपना मुंह खोलो और अपने मुंह से जो भी शब्द निकाले वह पहले ही सोच विचार कर ले कि इन शब्दों का सामने वाले पर क्या प्रभाव पड़ेगा और लोग कैसे मेरे इन शब्दों को समझेंगे|

मौन पर सुविचार कुछ और बातें

  • कम बोलना भी एक बहुत बड़ी कला होती है जो लगभग सफल लोगों के पास ही पाई जाती है| इसीलिए आज से ही आप भी मौन रहने का अभ्यास करें और तभी बोले जब बोलने की आवश्यकता हो|
  • बिना बात की कभी भी बकबक ना करें और बिना सोचे विचारे कोई भी शब्द मुंह से ना बोले|
  • कुछ भी बोलने से पहले उसके बारे में सोच ले और यह भी सोच ले कि मेरे बोलने से लोग लोगों की सोच पर किस तरह असर पड़ेगा और फिर मुझे किस तरह से समझने की कोशिश करेंगे|
  • कभी भी बेकार की बातें ना करें और रुचिकर बातें ही करने की कोशिश करें|

तो अगर आप भी इसी तरह मौन रहकर अपने अपने मुंह को कम खोलने की कोशिश करोगे उतना ही आपके विचार शुद्ध रहेंगे और आप भी दूसरों से बिना प्रभावित रहे हुए अपनी सोच को उनके सामने रख सकते हो| इसीलिए हमेशा बोलने से पहले हजार बार सोच लें और फिर ही बोले|


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