crossorigin="anonymous"> विकलांगता सफलता में एक बाधा नहीं है|अपंगता कोई अभिशाप नहीं

विकलांगता सफलता में एक बाधा नहीं है|अपंगता कोई अभिशाप नहीं

विकलांगता सफलता में एक बाधा नहीं है

आपने ऐसे बहुत से लोग देखे होंगे जो अपंग होने के बाद में भीख मांगना शुरू कर देते हैं और उनको लगता है कि अब वह यही काम कर सकते हैं| वहीं पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपंग होने के बाद में भीख मांगने की वजह कुछ कार्य करने की ठान लेते हैं और उस कार्य को कर कर जल्दी ही सफलता को भी पाते हैं|

इसीलिए कहा जाता है कि अपंगता सिर्फ हमारी सोच है| यह हमारी कमजोरी नहीं है| अगर भगवान ने हमें विकलांग बनाया है या कमजोर बनाया है तो इसका मतलब यह नहीं कि हम कुछ भी कार्य नहीं करें| हम जितना भी कार्य कर सकते हैं उतना हमें करने की सोच रखनी चाहिए| इसलिए जान लें की विकलांगता सफलता में एक बाधा नहीं है|

आखिर विकलांग कौन हैं?

मेरी नजर में विकलांग व्यक्ति वह नहीं जो शरीर से विकलांग है बल्कि विकलांग व्यक्ति वह है जो अपनी सोच से विकलांग है| कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके पास अपना पूरा शरीर होते हुए भी वे कुछ काम नहीं करते और खुद को कमजोर समझने लग जाते हैं और वहीं पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका आधा शरीर होने के बावजूद भी वह इतनी मेहनत करते हैं जितनी शायद पूरा शरीर होने वाले भी लोग नहीं करते|अत विकलांगता प्रगति में बाधक नहीं हैं|

सभी विकलांग व्यक्ति कमजोर नहीं होते

मैंने देखा है कि जिनके दोनों हाथ नहीं है वह भी अपने जीवन में काम करते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं| वहीं पर कुछ लोग ऐसे होते हैं जो विकलांग होने के बाद में घर में बैठ जाते हैं और जिनको लगता है कि अब कुछ भी नहीं कर पाएंगे|

अगर हम विकलांग होने के बावजूद भी काम करने की ठान ले तो यह दुनिया भी हमारा साथ देगी| वह भी हमें दूसरों से अलग देखेगी और सबसे पहले हमारी मदद के लिए आगे आएगी| इसीलिए जरूरी है हम खुद को कमजोर ना समझे और काम करना शुरू कर दें और सफलता को पाने की पूरी कोशिश करें |

विकलांगता सफलता में एक बाधा नहीं है

क्या शारीरिक विकलांगता व्यक्ति की प्रगति में बाधक बन सकती है?

अपंगता हमारी सफलता तय नहीं करती| अगर आपको ऐसा लगता है कि हमारी अपंगता हमारी सफलता को तय कर देगी तो यह बिल्कुल भी सही नहीं है | इतिहास भी ऐसे लोगों का गवाह है जो बहुत विकलांग(अपंग) थे फिर भी उन्होंने मेहनत करके काम अपने नाम को कमा लिया|

बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनके पास दोनों टांग ना होने के बावजूद भी यह लोग काम करते हैं | वे कुछ ऐसा काम करते हैं जो बैठे- बैठे कर सके और अपने परिवार को पाल सके|इसलिए विकलांगता कोई अभिशाप नहीं हैं|

बहुत से लोग ऐसे भी होते हैं जो बिना हाथों के भी सिर्फ अपने शरीर से ही काम करते हैं और दुनिया उनका साथ भी देती है |इसलिए जान लें की कामयाबी में बाधा नहीं विकलांगता बल्कि हमारी सोच हैं|इसलिए विकलांगता कोई अभिशाप नहीं हैं|

सोच से कभी भी विकलांग मत होना

इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ता कि आप विकलांग हो या नहीं हो बल्कि इस बात से फर्क पड़ता है कि आप की सोच कैसी है| अगर आपने खुद को अपनी सोच के अंदर विकलांग बना लिया है तो यकीनन आप विकलांग ही हो और अगर आप अपनी सोच से विकलांग नहीं हो तो आप अपने शरीर से कभी भी विकलांग नहीं हो सकते|

इसीलिए जरूरी यह है कि हम भले ही अपने शरीर से विकलांग पर हमें कभी भी अपनी सोच से विकलांग नहीं होना चाहिए और खुद को कमजोर नहीं मानना चाहिए|

विकलांगता कोई अभिशाप नहीं – हम दूसरों से कम नहीं है |

  • हम दूसरों से कम नहीं है |हम दूसरों से कमजोर नहीं है| भगवान ने हमें विकलांग बनाया है तो यह हमारी कमजोरी नहीं बल्कि हमारी ताकत है और हम उस ताकत का फायदा उठाकर सफलता को जरूर प्राप्त करेंगे|
  • इस दुनिया में दो हाथ वाले वह काम नहीं कर सकते जो एक हाथ वाला करके दिखा देता है|
  • इस दुनिया में दोनों टांगों वालों ने दुनिया को नहीं जीता है बल्कि बिना टांगो वालों ने भी इस दुनिया को जीत कर दिखाया है| इसलिए जान लें विकलांगता प्रगति में बाधक नहीं हैं|

बस आपकी सोच होनी चाहिए कि आप को जीतना है या हारना है| अगर आप बैठे रहे तो आप हार इसीलिए चलते रहने की सोचो और जीत जाओ|

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